आगरा में आदेश का पालन न होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, DM सहित 8 अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी
- सुप्रीम कोर्ट ने आगरा के राजा की मंडी बाजार में अतिक्रमण हटाने के आदेश का पालन न करने पर प्रमुख सचिव नगर विकास, मंडलायुक्त, और डीएम सहित आठ अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण न हटाने पर अधिकारियों को नोटिस दिया।
- राजा की मंडी बाजार में फुटपाथ, रास्ते पर कब्जा पाया गया।
- एक आईएएस अधिकारी पर कार्रवाई रोकने का आरोप है।
जागरण संवाददाता, आगरा। सुप्रीम कोर्ट के तीन फरवरी के आदेश के बाद भी राजा की मंडी बाजार के फुटपाथ और रास्ते को जिला प्रशासन कब्जामुक्त नहीं करा सका है। शुक्रवार को कोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई।
डबल बेंच में हुई सुनवाई में प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी सहित आठ अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया गया है। डीएम ने दो फरवरी को कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया था जिसमें विवादित भूमि को सरकारी बताया था। अवमानना याचिका की अगली सुनवाई चार मई को होगी।
एमजी रोड स्थित राजा की मंडी बाजार(लाभ चंद्र मार्केट) 79 साल पुराना है। बाजार के लिए 459 वर्ग गज नजूल भूमि और 626 वर्ग गज नगर निगम की भूमि का पट्टा धर्मचंद्र जैन को हुआ था। 90 साल के पट्टे का 30-30 साल में नवीनीकरण कराना था।
निगम प्रशासन ने 1980 और 2010 में पट्टे का नवीनीकरण किया गया। वर्ष 1999 में नजूल भूमि फ्री होल्ड हो गई। वर्ष 2008 में भूमि और किरायेदारी को लेकर विवाद शुरू हो गया। इसके बाद यह विवाद बढ़ता चला गया। वर्ष 2008 से 2025 के मध्य आधा दर्जन से अधिक डीएम और एडीएम प्रोटोकाल ने बाजार की विवादित भूमि की जांच की।
भूमि को फुटपाथ और रास्ते का माना लेकिन एक बार भी कार्रवाई नहीं की गई। अप्रैल 2025 में नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने निगम की भूमि का पट्टा रद कर दिया। जनवरी 2026 में यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया। दोनों पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए।
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कोर्ट ने डीएम को शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश दिए। दो फरवरी को डीएम ने सरकारी भूमि बताते हुए शपथ पत्र दाखिल किया। यह माना कि रास्ता और फुटपाथ पर कब्जा है। तीन फरवरी को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस महादेवन ने अहम फैसला सुनाया।
दो सप्ताह में कार्रवाई के आदेश दिए। पांच फरवरी को डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने संयुक्त कमेटी गठित की। 10 फरवरी को एडीएम प्रोटोकाल प्रशांत तिवारी, एडीएम नागरिक एवं आपूर्ति अजय नारायण सिंह सहित अन्य अधिकारी बाजार पहुंचे और चार घंटे तक विवादित भूमि की पैमाइश की।
जांच में पाया गया कि दो होटल और 70 दुकानें बनी हैं। होटल के पिलर फुटपाथ और रोड पर बने हैं। कुछ यही स्थिति दुकानों की भी है। निर्धारित तिथि तक कार्रवाई नहीं की गई। संयुक्त कमेटी ने जांच की तो कलक्ट्रेट और तहसील सदर में पुराने नक्शे नहीं मिले। कई और दस्तावेज भी गायब थे।
जिसपर जिला प्रशासन ने राजस्व परिषद से तकनीकी टीम भेजने की मांग की। टीम अभी तक नहीं आई है। चार अप्रैल को याचिकाकर्ता अमरजोत सिंह सूरी ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। शुक्रवार को कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी सहित आठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। वाद की अगली सुनवाई चार मई को होगी।
आईएएस अधिकारी के दबाव में नहीं हो रही कार्रवाई
कोर्ट में आईएएस अधिकारी सुदीप जैन से संबंधित दस्तावेज दाखिल किए गए हैं। राजा की मंडी बाजार की भूमि उनके नाम भी दर्ज है। निगम के गृहकर की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने आईएएस अधिकारी द्वारा स्थानीय अफसरों को फोन करने की भी जानकारी दी है। साथ ही दबाव के चलते ठोस कार्रवाई न होने की बात कही है।
इन अधिकारियों को नोटिस
प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी, नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल, एडीएम प्रोटोकाल प्रशांत तिवारी, एडीएम नागरिक एवं आपूर्ति अजय नारायण सिंह, एसडीएम सदर सचिन राजपूत, सहायक नगरायुक्त श्रद्धा पांडेय।
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