Hindi News / शहर और राज्य

श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष: योगेश्वर श्रीकृष्ण की पावन लीला, दिव्य दर्शन एवं जन्मोत्सव का सम्पूर्ण विधान

श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष: योगेश्वर श्रीकृष्ण की पावन लीला, दिव्य दर्शन एवं जन्मोत्सव का सम्पूर्ण विधान
श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष: योगेश्वर श्रीकृष्ण की पावन लीला, दिव्य दर्शन एवं जन्मोत्सव का सम्पूर्ण विधान
  • अध्यात्म गुरु
  • स्वामी जितेन्द्रिय महाराज
  • (अध्यात्म एवं साधना विशेषज्ञ)
  • संपर्क सूत्र: 9999979150 7065155183
  • परामर्श: ऑनलाइन एवं व्यक्तिगत (अपॉइंटमेंट हेतु संदेश भेजें)

"जहाँ हो धर्म का वास, वहीं हो श्री कृष्ण का प्रकाश; आइए मिलकर मनाएं कन्हैया का जन्मोत्सव, जो जीवन में भर दे भक्ति और उल्लास!"

सनातन संस्कृति में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के आराध्य, योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का महात्म्य है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग पर मध्यरात्रि में हुआ यह अवतार संपूर्ण मानवता के लिए ज्ञान, प्रेम और कर्मयोग का संदेश लेकर आया। यह पावन पर्व हमारे भीतर की अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटाकर दिव्यता का संचार करता है।

भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक विशेषताएं एवं जीवन दर्शन श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव जाति के लिए एक जीवंत एवं प्रेरणादायी ग्रंथ है। उनके विभिन्न रूप जीवन के हर चरण में हमारा मार्गदर्शन करते हैं: पूर्ण पुरुषोत्तम और योगेश्वर: सोलह कलाओं से परिपूर्ण भगवान श्रीकृष्ण ने यह सिद्ध किया कि सांसारिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए भी ईश्वर से कैसे एकाकार रहा जा सकता है।

गीता के प्रणेता (महान दार्शनिक): कुरुक्षेत्र के प्रांगण में अर्जुन को दिए गए श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश आज भी संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए सबसे बड़ा जीवन दर्शन और कर्तव्य पथ का मार्गदर्शक हैं।

भक्ति और प्रेम के आधार: ब्रज की कुंज गलियों में उनकी बाल लीलाएं, गोपी-प्रेम और रासलीला जीव और ब्रह्म के अद्वितीय मिलन का शाश्वत प्रतीक हैं।

संकटमोचन और धर्म रक्षक: बाल्यावस्था से ही दुष्टों का संहार और गोवर्धन पर्वत धारण कर भक्तों की रक्षा करना इस बात का प्रमाण है कि शरणागत की रक्षा के लिए वे सदैव तत्पर रहते हैं।

जन्माष्टमी का आध्यात्मिक एवं दार्शनिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, द्वापर युग में जब पृथ्वी पर अधर्म और पाप का भार बढ़ गया था, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। मध्यरात्रि (निशीथ काल) का समय इस बात का प्रतीक है कि जब जीवन में अज्ञान, मोह और संकट का सबसे घना अंधकार होता है, तभी ज्ञान रूपी श्री कृष्ण का प्राकट्य होता है। इस दिन व्रत, उपवास और रात्रि जागरण करने से साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान की असीम अनुकंपा की प्राप्ति होती है।

पूजा का शुभ मुहूर्त एवं निशीथ काल विधान

जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की पूजा हमेशा मध्यरात्रि (निशीथ काल) में की जाती है, क्योंकि उनका प्राकट्य रात्रि 12 बजे हुआ था।  

निशीथ काल पूजा का मुख्य समय: मध्यरात्रि 11:58 से लेकर 12:44 तक (स्थानीय समयानुसार)।

व्रत का पारण (पारण काल): व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के पश्चात, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के पूर्ण होने पर किया जाता है।

विधिवत जन्मोत्सव, पूजन अनुष्ठान एवं मंत्र विधान

संकल्प एवं शुद्धि: प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें और घर के मंदिर या ईशान कोण को स्वच्छ करें।

मंडप एवं चौकी सज्जा: एक सुंदर चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) को पालने या आसन पर विराजमान करें।महामंत्र जप: पूजन के दौरान निरंतर भगवान के मूल मंत्रों का स्मरण करें: द्वादशाक्षर मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"कृष्ण गायत्री मंत्र: "ॐ कृष्णाय विद्महे, बलभद्राय धीमहि, तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।" अभिषेक अनुष्ठान: ठीक रात्रि 12 बजे शंख और घंटियों की गूंज के बीच पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) तथा पवित्र जल से लड्डू गोपाल का अभिषेक करें।  दिव्य शृंगार: भगवान को सुंदर पीतांबर वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और वैजयंती माला से अलंकृत करें।  विशेष भोग अर्पण: मक्खन, मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतु फल और विभिन्न मिठाइयों का भोग लगाएं। साथ ही डंठल वाले खीरे को काटकर 'नाल छेदन' की परंपरा निभाएं। आरती और क्षमायाचना: कपूर अथवा शुद्ध घी के दीपक से आरती करें, झूला झुलाएं और अंत में अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी: राशि-अनुसार विशेष पूजन उपाय एवं चमत्कारी मंत्रानुष्ठान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अपनी राशि के अनुसार विशेष उपाय और मंत्रों का जाप करने से भगवान श्री कृष्ण की असीम कृपा प्राप्त होती है, जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं कि किस राशि के जातक को किस विशेष मंत्र और विधि से कन्हैया की आराधना करनी चाहिए:

1. मेष राशि (Aries)

विशेष मंत्र: "ॐ क्लीं कृष्णाय नमः"

पूजा उपाय: इस राशि के जातकों को जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण को लाल रंग के पुष्प और मक्खन-मिश्री का भोग अवश्य अर्पित करना चाहिए। इससे पराक्रम और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

2. वृषभ राशि (Taurus)

विशेष मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"

पूजा उपाय: वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं। इस दिन बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें और उन्हें सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं। जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं की वृद्धि होगी।

3. मिथुन राशि (Gemini)

विशेष मंत्र: "ॐ श्रीं कृष्णाय पूर्णब्रह्मणे नमः"

पूजा उपाय: मिथुन राशि के जातकों को जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को बांसुरी और पीले वस्त्र अर्पित करने चाहिए। गाय को हरा चारा खिलाने से विशेष लाभ मिलता है।

4. कर्क राशि (Cancer)

विशेष मंत्र: "ॐ देवकीनंदाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्"

पूजा उपाय: इस राशि के लोग रात्रि के समय भगवान कृष्ण को चांदी के बर्तन में मिश्री युक्त दूध का भोग लगाएं। मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द के लिए यह उपाय उत्तम है।

5. सिंह राशि (Leo)

विशेष मंत्र: "ॐ क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा"

पूजा उपाय: सिंह राशि के जातकों को सूर्य देव के समान तेज और मान-सम्मान प्राप्ति के लिए भगवान श्रीकृष्ण को लाल चंदन और पीले गेंदे के फूलों की माला अर्पित करनी चाहिए।

6. कन्या राशि (Virgo)

विशेष मंत्र: "ॐ श्रीं कृष्णाय नमः"

पूजा उपाय: कन्या राशि वाले जातक जन्माष्टमी की रात धनिया पंजीरी का विशेष भोग लगाएं और गरीबों या जरूरतमंदों में अन्न-धन का दान करें। बुद्धि और व्यापार में उन्नति होगी।

7. तुला राशि (Libra)

विशेष मंत्र: "ॐ क्लीं कृष्णाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा"पूजा उपाय: तुला राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा रानी का भी स्मरण करना चाहिए। इत्र या सुगंधित पुष्प अर्पित करने से जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है।

8. वृश्चिक राशि (Scorpio)

विशेष मंत्र: "ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय नमः" पूजा उपाय: इस राशि के जातकों को शत्रुओं पर विजय और संकटों से मुक्ति के लिए जन्माष्टमी की रात तुलसी की माला से कम से कम एक माला इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।

9. धनु राशि (Sagittarius)

विशेष मंत्र: "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" एवं "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" पूजा उपाय: धनु राशि के स्वामी गुरु हैं। इस दिन पीले वस्त्र पहनकर भगवान कृष्ण को बेसन के लड्डू या पीले पेड़े का भोग लगाएं और केसर का तिलक लगाएं।

10. मकर राशि (Capricorn)

विशेष मंत्र: "ॐ शं शनैश्चराय नमः" तथा "ॐ कृष्णाय नमः"पूजा उपाय: मकर राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के साथ-साथ गीता पाठ भी करना चाहिए। पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से विशेष कृपा मिलती है।

11. कुंभ राशि (Aquarius)

विशेष मंत्र: "ॐ अं अनिरुद्धाय नमः"

पूजा उपाय: कुंभ राशि के जातकों को जन्माष्टमी की रात्रि में गरीबों को भोजन कराना चाहिए और भगवान कृष्ण को काले तिल या उससे बनी मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।

12. मीन राशि (Pisces)

विशेष मंत्र: "ॐ क्लीं कृष्णाय नारायणाय स्वाहा"

पूजा उपाय: मीन राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण को पीले वस्त्र और पीले पुष्प अर्पित करने चाहिए। साथ ही, मंदिर में हल्दी और चने की दाल का दान करना आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

अध्यात्म गुरु स्वामी जितेन्द्रिय महाराज का संदेश है कि पूरी श्रद्धा, नियम और सात्विक भाव से किया गया अनुष्ठान मनुष्य के जीवन के सभी संतापों को दूर कर देता है। अध्यात्म गुरु स्वामी जितेन्द्रिय महाराज की ओर से सभी भक्तों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की अनंत मंगलमय शुभकामनाएं। "जय श्री कृष्ण! हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की!"क्या आपके जीवन में ग्रहों की चाल बाधक बन रही है? क्या कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता आपसे कोसों दूर है? तंत्र, मंत्र और ज्योतिष के प्राचीन विज्ञान से अपनी समस्याओं का जड़ से समाधान पाएं।


Views 8

Leave a comment

Current time: 3 Sep 2026, 09:08 PM